ग्लानि [यात्रा संस्मरण]- रचना सागरबात कुछ वर्षों पहले की है , जब जन-जीवन सामान्य चल रहा था। उस समय सभी अपनी अपनी दिनचर्या में व्यस्त और मस्त थे । आज लोगों का विश्वास अच्छाई और भलाई पर से उठता सा जा रहा है। मेरी यह यात्रा वृतांत आज के जमाने में भी छिपी अच्छाई और इंसानियत से है।
यह वाक्या कुछ उस समय का है जब बस...
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27
Mar
जब कभी भी हमारे माता पिता को हमारी आवश्यकता हो तो उस समय हमें उनके लिए जरूर आगे आकर उनका दामन थामना चाहिए । वे हमारी नींव हैं उनके बिना हमारा क्या अस्तित्व ... इसी भावना से जुड़ी मेरी ये कविता ...... जिसका शीर्षक है . . . . . . इंतजार इंतजार [कविता]: रचना सागर
यूँ तो आपको मैं इक पल भी
भूली न थी
पर...
माँ एक ऐसा शब्द जो अपने आप में सम्पूर्ण है । पर जाने अनजाने हम उसकी गरिमा को ठेस पहुंचा देते हैं । उसका दिल दुखा देते हैं । पर फिर भी वो अपने बच्चों के लिए अच्छा ही चाहती है। ऐसा सिर्फ एक माँ ही करती है माँ .."एक माँ की सच्चाई ...
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एक माँ की सच्चाई ...[बाल कविता]: रचना सागर
मैंने देखा...
जब बात एक औरत की पाबंदी और उसे आजादी देने की आती है तो घूमना, खाना ,उठना, बैठना, पढ़ना ये सब उसकी आजादी के पैमाने गिनाए जाते हैं । इसी संदर्भ में पेश है मेरी नई कविता ... आजादी का पैमाना
[कविता]: रचना सागर
मैं चिड़िया होकर भी
पंख फड़फड़ाने से
कतराती रही
यहां तो अंडे भी चोच
मार जाते रहे
जो चुपचाप...
आज के इस समय में हर इंसान से हमारा कोई ना कोई रिश्ता जुड़ ही जाता है कुछ मीठे अनुभव दे जाते हैं तो कुछ कड़वी सीख...इसी संदर्भ में पेश है मेरी नई कविता ... एक खामोशी भरा रिश्ता [कविता]: रचना सागर
रिश्ता है हमारे बीच दर्द का
जहाँ फुर्सत नहीं एक पल गँवाने का
मैंने हर पल तुम्हें...