बेल बूटे से वृक्ष बनने का साहस दिया खुद को
जुड़ी मैं तुझसे तो चुप्पी के भी मुस्कान आई
जिंदगी की रुकावटों में भी पहचान पाई
जुड़ी मैं तुझसे तो जान पाई खुद को मैं
मेरी किस्मत भी मुझे
अजब मुंह चिढ़ाती है
पास दिखती- सी मंजिल को
ओझल-सी कर जाती है
मैंने सुना है
लोगों को
अक्सर, ये कहते
हर कामयाब पुरुष के
पीछे
औरत का साथ होता है
पर
मैंने ये जाना (अब तक)
हर कामयाब औरतों के
पीछे कोई पुरुष छिपा होता है
बहुत कम होते है वो लोग
जो समर्पण मे सच्चा विश्वास रखते हैं
नहीं तो
हर कोई यहां फायदा उठाने को बैठा है
आईना हर घर में है फिर भी
खुद से नजर चुराए बैठा हैं
मेरी किस्मत भी मुझे
अजब मुंह चिढ़ाती है
पास दिखती- सी मंजिल को
ओझल-सी कर जाती है
मैं डंडा हूँ
महात्मा गांधी जी का डंडा हूँ
हर दम साथ रहता हूँ
हरदम काम आया हूँ
मैं डंडा हूँ
गांधी जी का डंडा हूँ
हरदम धूम मचाया हूँ
दांडी मार्च कर दिखाया हूँ
नमक आंदोलन हो या सत्याग्रह
सब समय काम आया हूँ
मैं डंडा हूँ
गांधी जी का डंडा हूँ
अंग्रेजों को दूर भगाया हूँ
पूरे भारत में
आजादी का झंडा लहराया हूँ
मैं डंडा हूँ
महात्मा गांधी जी का डंडा हूँ