मेरी नज़र से देखो...गर सहज़ लगती हैस्त्री की जिंदगी तोमेरी नजर से देखोसब कुछ होते हुए भीमोहताज हैदिनभर काम करते हुए भीबेकार हैअपना सब कुछ देकर भीनिकम्मी और लाचार हैकहते है बराबर का सम्मान हैपर घड़ी-घड़ी नज़रों की शिकार हैकौन कहता है समय बदल गया हैआप ये बताओ ...दहेज देने का चलन खत्म हो गया हैसब नज़रों का भ्रम हैक्योंकि...
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मेरे बेटे की मांग पर यह कविता उस वीर के नाम जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अंग्रेजों में एक ख़ौफ़ पैदा कर आजादी की लड़ाई में एक जान फूंक दी। .... पेश है मेरी नई कविता "चंद्रशेखर बनूंगा मैं "
चंद्रशेखर बनूंगा मैं [बाल कविता]: रचना सागर
माँ मुझ को गुलेल दिला दो
चंद्रशेखर...
आज हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है की हमें हर साल 26 जनवरी को गणतन्त्र दिवस मनाने का मौका मिलता है| हर साल की तरह इस साल भी सभी को इस दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाए व इस दिवस पर पेश है मेरे नई बाल कविता "मेरे सपनों का भारत "
मेरे सपनों का भारत [बाल कविता]: रचना सागर
मेरे भारत में...
हमारे घर आंगन मे...हमारे रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरण को बचाने मे सबसे बड़ा योगदान इन चिड़ियों का है ..इनके बिना हमारा जीवन परिवेश अधूरा है ..... पेश है मेरी नई कविता "मैंना "
पर्यावरण बचाती मैना [बाल कविता]: रचना सागर रोज सवेरे आती मैना,
मेरे मन को भाती मैना,
बचा खुचा...
उत्तरी भारत के हिंदु साल की शुरूआत का पहला त्योहार है.... इस पर्व को बड़े बूढ़ो के आशीर्वाद के साथ शुरूआत करते है..... इसे उत्तरी भारत मे मकर संक्रांती व बिहार उत्तर प्रदेश आदि मे खिचड़ी के नाम से जानते है ..... पेश है मेरी नई कविता "खिचड़ी "
खिचड़ी [बाल कविता]: रचना सागर
मकर संक्रांति से
नववर्ष...
साल की शुरूआत का पहला त्योहार है.... इसको बड़े बूढ़ो के आशीर्वाद के साथ..... नए फसल होने की खुशी मे मनाया जाता है...... पेश है मेरी नई कविता लोहड़ी आई बधाइयां छाई
लोहड़ी आई बधाइयां छाई [बाल कविता]: रचना सागर लोहड़ी आई बधाइयां छाई चारों ओर से गुड़ और तिल की खुशबू आई
साथ मूंगफली और गजक के महफिल में रौनक आई...
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बच्चों की बातें मम्मी की कलम द्वारा
इस लॉकडाउन में ,
इंसान लॉक हो गए ,
प्रकृति स्वतंत्र हो गई।
नदियां खिल- खिलाई,
फूल मुस्कुराए ।
इस लॉकडाउन में,
मैं कोयल की,
कू कू सुन पाया ।
कू कू कर उसको चिढ़ाया ,
बड़ा मजा आया।
इस लॉकडाउन में,
मैं चिड़िया का
घोंसला देख पाया।
दाना चुगते वे प्यार से
ये करीब से देख...