बेल बूटे से वृक्ष बनने का साहस दिया खुद को
जुड़ी मैं तुझसे तो चुप्पी के भी मुस्कान आई
जिंदगी की रुकावटों में भी पहचान पाई
जुड़ी मैं तुझसे तो जान पाई खुद को मैं
फागुन
इस फागुफागुन में
दिल दर्द के गुलाल से भर गया
जब भाई के हाथों भाई कत्लेआम हो गया
जिगर में एक टीस सी उठ गई
जब राम और मुहम्मद के नाम पे
गलियां बंट गई
अजान और घंटी में फासला तो सदियों से चलती आई
पर आज शारदा ने सलमा से क्यूँ नजरें निरस्त कर गई
इस रंगों के त्योहार में बेरंग दिखे जमाना
गले मिलने की बजाए पीठ दिखाये घराना ...
ये क्या और क्यूं हो गया
जरा कोई तो बताना ...
गर सहज़ लगती है
स्त्री की जिंदगी तो
मेरी नजर से देखो
सब कुछ होते हुए भी
मोहताज है
दिनभर काम करते हुए भी
बेकार है
अपना सब कुछ देकर भी
निकम्मी और लाचार है
कहते है बराबर का सम्मान है
पर घड़ी-घड़ी नज़रों की शिकार है
कौन कहता है समय बदल गया है
आप ये बताओ ...दहेज देने का
चलन खत्म हो गया है
सब नज़रों का भ्रम है
क्योंकि आज भी बाहर के साथ
घर देखना उनका ही कर्तव्य है . . . . 2
हिमाचल की वादिया
अनगिनत चीज़े सीखी मैंने यहां
पाया अपनी उम्मीद से बढ़कर यहां
खट्टी मीठी यादों का बसेरा है दिल में
कई सारे रिश्तों को संजोया है दिल में
खेला कूदा किया मस्ती हजार
हर दिन मनाया जैसे नया त्यौहार
सरसरी हवाएं वो आँधी-तूफान
ये ऊँची वादियां ये गगन चुम्बी पहाड़
और इन गगन चुम्बी पहाड़ियों पर
झिलमिलाती -सी बत्तियां
आशा जगाती, जुनून भर जाती
अद्भुत, अविस्मरणीय, याद दे जाती
थोड़ी सी मुश्किल मुझे ये राह होगी
तेरी जो आदत, मुझे वो छोड़नी होगी ।

हिन्द और हिंदी का सम्मान करें हम
भारत की माटी हिंदी से प्यार करें हम
हिंदी का पूर्ण विकास हो
हिंदी कभी न उदास हो
संस्कृत की बेटी कहलाए हिंदी
मगध अवधी के संग हैं हिंदी
उर्दू अंग्रेजी है सखिया इसकी
साहित्य में भी नाम बनाए हिंदी
डोर है हिंदी पतंगा है हम
गुरू है हिंदी शिष्या है हम
सोच में हिंदी स्वप्न में हिंदी
परचम लहराए हिंदी का हम
लेख में हिंदी सुलेख में हिंदी
राष्ट्र का है परिचय हिंदी
वंदनीय है पूजनीय है
संस्कार की जननी हिंदी
हिंदी से उत्थान हमारा
हिंदी को प्रणाम हमारा ... -2
हिंदी दिवस की शुभकामनाएं🙏
मेरी किस्मत भी मुझे
अजब मुंह चिढ़ाती है
पास दिखती- सी मंजिल को
ओझल-सी कर जाती है
मैंने सुना है
लोगों को
अक्सर, ये कहते
हर कामयाब पुरुष के
पीछे
औरत का साथ होता है
पर
मैंने ये जाना (अब तक)
हर कामयाब औरतों के
पीछे कोई पुरुष छिपा होता है
बहुत कम होते है वो लोग
जो समर्पण मे सच्चा विश्वास रखते हैं
नहीं तो
हर कोई यहां फायदा उठाने को बैठा है
आईना हर घर में है फिर भी
खुद से नजर चुराए बैठा हैं
मेरी किस्मत भी मुझे
अजब मुंह चिढ़ाती है
पास दिखती- सी मंजिल को
ओझल-सी कर जाती है
औरत मे अनगिनत भावनाए समाहित होती है उन्ही भावनाओ की एक छोटी सी झलक.....आज का इस महिला दिवस का उपलक्ष मे ....
कोई तो मुझ में बात रही होगी,
तभी तो तेरी महफिल मे मेरी चर्चा हुई होगी।
रास्तो की थपकियों से इंसान चलने का हुनर सीखता है,
वरना कहाँ उसे सही रास्ते का पता होता है....
न दिल होता न दर्द होता
न ये दिल और दर्द का
रिश्ता हम से होता
न महफिल जमती
न पैमाना चढता
न ही आँखो से
अश्क छलकता
ये दिल ही तो है ....
इश्क इश्क सबने किया
इश्क न जाने कोय
इश्क की इबादत जो करे
इश्क उसी का होय।